BEBASI

हम या तुम सब बेबस, न हो तो महसूस करो!

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vinodkumar


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दामिनी का दामन

Posted On: 30 Dec, 2012  
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Others पॉलिटिकल एक्सप्रेस लोकल टिकेट में

4 Comments

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

9e78marina:c289Всем привет!Кормила грудью до трех месяцев, потом перевела ребенка на Ñѐ¼ÐµÑÑŒ.РеЁ·Ã‘ƒÐ»ÑŒÑ‚°Ã — высыпаюсь ночью (смесь разводит наш папа), у ребенка сразу перестал болеть живот, из груди ничего не сочится, не нужно постоянно менять майки (прокладки меня не спасали), полная свобода — беру с собой термос, смесь и гуляем хоть целый день:)f7

के द्वारा:

О каком качестве обучения может идти речь? Если весь педогогический состав во главе с директором, старается из простой школы сделать что-то элитное. Это уже не школа, а гимназия, а до этого она еще пару раз БµÑ€ÐµÐ¸Ð¼ÐµÐ½ÐþвывалаÿÑŒ. Не школа-а фуфло. Лично я своего сына переводить буду в другую, простую школу.

के द्वारा:

à‚¤Ã Â¤Â¨Ã Â¥ÂÃ Â¤ÂµÃ Â¥Â€Ã Â¤ÂœÃ Â¥Â‡Ã Â¤ÂÂतµà¥à¤¹à¤¾ लिहिणं सुरु केलं होतं. तेंव्हा घेतलेले पहिले पाऊल इतहपर्यंत पोहोचबेल असे कधिच वाटले नव्हते.. लिहिणे तर सुरु ठेवणार आहेच फक्त अशी वेळ येऊ नये की लिहायला काही विषयच नाही म्हणजे झाला..

के द्वारा:

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

के द्वारा: yamunapathak yamunapathak

मेरा कार्यशैली सुनियोजित कहने का तात्यपर्य जन भावनाओं को समझने से ही है। डीपी यादव को पार्टी में न लेना, सीधी सच्ची बात जन साधारण की भाषा में कहना। विवास्पद बयानों से किनारा करना, आदि साबित करते हैं कि अखलेश में जन भावनाओं को समझने की काबलियत है, जो न तो भूतपूर्व(चुनाव हारने के बाद हो चुके राहुल) राजकुमार में हैं और न ही धर्म की मदिरा पिलाने वाली साध्वी में, माया जी की माया तो माया ही जान सकती है। न उन्हें जनता जान करती है और न वह जनता।   चुनाव हारने के बाद उनका बयान सुनिये उन्हें जनता ने नहीं काँग्रेस एवं भाजपा ने हराया। जैसे इन दोंनो पार्टियों की ही वोट देने का अधिकार था। जनता को वेबकूफ समझते हैं ये लोग। इस बार जनता ने वेबकूफ बना दिया। माया से सबक लेकर अब अखलेश की जनता को वेबकूफ बनाने की हिम्मत नहीं पड़ेगी।

के द्वारा: dineshaastik dineshaastik

के द्वारा: vinodkumar vinodkumar

के द्वारा: vinodkumar vinodkumar

मान्यवर विनोद जी, सादर. हम कोई जज नहीं हैं कि औचित्य - अनौचित्य पर ही विचार करते रहें, हम इस देश के एक नागरिक भी हैं, जिस पर अपने परिवार के पालन-पोषण कि जिम्मेदारी भी होती है. इस जिम्मेदारी को निभाने में आज कि भ्रस्ट व्यवस्था और महंगाई सबसे बड़ी बाधा है. इससे न आप इनकार कर सकते हैं न हम. और इस चक्की का निर्माण इन्ही राजनेताओं ने किया है, जिसमे हम पिस रहे हैं. पंडित रमेश जी ने एक जगह लिखा है उसे उद्धृत कर रहा हूँ --- बाबा रामदेव पर लाठिया बरसाई गयी, कभी प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह ने फोन कर के एक बार भी उनसे खैर नहीं पूछा. अरविंद केजरीवाल पर चप्पलें फेकी गयी कभी उन्हें इसकी निंदा करने क़ी चेत नहीं आई. लेकिन आज शरद पवार को किसी ने चाटा मारा तो पूरी संसद ही हाल चाल पूछने में लग गयी. अरे थप्पड़ ही तो मारा, देश क़ी अस्मिता, संप्रभुता, अर्थव्यवस्था या स्वाभिमान को तो नहीं रौंदा? जैसा कि अब्दुल मजीद डार, मुफ्ती मुहम्मद सईद, लोन एवं गनी काशमीर को भारत का अँग मानते ही नहीं. फिर भी उन्हें ससम्मान विशिष्ट अतिथि का दर्ज़ा देकर सहमति एवं रायमसविरा के लिए आमंत्रित किया जाता है. राहुल के शब्द “भिखारी” पर बवाल मचाना केवल लोगो क़ी तन्मयता को भंग कर सीधे सादे लोगो क़ी सरल मानसिकता को अपने पक्ष में कर “वोट” बटोरने का पापपूर्ण एवं भोंडा षडयंत्र है. और कुछ नहीं. विचार करें, सोचें, सामजिक वर्ग और राजनीतिक वर्ग---- इन दोनों में से हम किस में आते हैं.

के द्वारा: shashibhushan1959 shashibhushan1959

Political parties or media both are trynig to get milage as happens very often in such cases. But the ground reality is suppressed. This is frustration of public, against the system, where in higher substrata, Beaurocrates and political big shorts as well as their brokers are enjoying at the cost of lower and middle class. Economic imbalances, political manipulations and corrupt system all are responsible for such incidents. But our Govt. since begining tried to suppress the common man's voice and resultant Khalistan andollan, ULFA, JKLF, naxalite, no one has tried to find out the root cause as to why this man power/resources are at unrest. Similarly, you cna not foo all the persons all the time, majority political party fooling the people of this country by just tagging with every problem some communal colouring or BJP and other NGO just to garner the votes and after reaching the parliament loot the country and to even those people. You jsut see the provisions of reservations how it is misused for political gains rather than lifting the level of those poor pepole. Can govt. is nto creating void by this card, today there is need of making such provisions for only economically backward people irresepctive of to which stream they are comming, but despit Mandal commission agitation Gopvt. did nothing to sort out the problem. Meida and political parties should take lesson if they did not understand public will teach them like this even worst than this like gadaffi. Because water or feeling can not be controlled for a long time it will flow in any direction if it is properly guided it become a productive force, but suppressed or curbed then it explode in any direction. Wise people take lesson from their mistake fools make a mess of it.Choince is yours.

के द्वारा:

वास्तव मे जिसे हम जनता का आक्रोश कह कर बढ़ावा दे रहे हैं…… वो अराजकता को बढ़ावा देने की बात है…. आप अगर कुछ सही कर रहे हैं तो भी आपके कई विरोधी खड़े हो जाते हैं…… जैसा की आप जानते ही है…. की इस बेईमान दुनिया मे ईमानदार व्यक्ति से अधिक दुश्मन किसी के नहीं होते है…. पुलिस के निर्ममता का एक कारण ये भी है की उसको अपराधियों के साथ मारपीट करते देखने के आदि हो चुके हम लोग जब किसी बेकसूर को भी पीटता देखते हैं तो बरबस ही ये मान लेते हैं की ये भी अपराधी ही होगा… और एक बेकसूर यूं ही पीट जाता है….. आक्रोश के नाम पर कल इसी तरह के लोग हर उस व्यक्ति को भी इसी तरह मारने लग सकते हैं जो की इनके किसी भी कृत्य का विरोध करेगा……. अफसोस इस बात का है की आज इस व्यक्ति का समर्थन करने वालों का मतदान वाले दिन वोट या तो जाति या धर्म या क्षेत्र या फिर नोट के लिए पड़ेगा…… और या फिर कुछ बुद्धिजीवी उस दिन मतदान से ही दूरी बनाए रखेंगे……

के द्वारा: Piyush Kumar Pant Piyush Kumar Pant

इस देश में गरीबों का कोई नहीं है, भगवान् भी लाचार है, यह घोर कलियुग है और राक्षशों का राज है | उस फूल सी कोमल बच्ची के साथ ऐसा दुष्कर्म कोई राक्षश ही कर सकता है | हमारी पुलिस तो खुद ही चोर और डाकुओ के गिरोह के अलावा कुछ नहीं है उनसे न्याय की आशा बेकार है | बीहड़ के डाकुओं में तब भी कुछ नैतिकता है वोह गरीब और लाचार को नहीं लूटते, और यह खाकी वर्दी वालो के लिए सब बराबर है | जो जितने बड़े चांदी के जूते से मारेगा उसी की तरफ से भौकेंगे | पता नहीं किसी एक को पकड़ कर मुजरिम बनाकर सबकी आँखों में धूल झोंक राखी है, उस बेचारी की माँ क्या करेगी पैसे का जोर तो है नहीं, कोई मदद करेगा तो पुलिस उसी को पकड़ कर परेशान करेगी, इसीलिए कोई कैसे सामने आए | नेता तो अभी अपनी जेबे भर रहे है चुनाव के पहले आएँगे कटोरा लेकर मगरमच्छ के आंसू बहाने , उनको क्या, जिसका गया वोही जाने | अभी नेताओ का कोई गया होता फिर देखते बनता बंदरो का उछल कूद और खिखिआहट सीबीआई, FBI, सीआईए, इंटरपोल, पुलिस सब की लाइन हाज़िर हो जाती और मुजरिम को पाताल से ढूड निकालती | इस देश में भ्रष्टाचार अपनी चरम सीमा पर है उत्तर प्रदेश में खासकर, यथा रजा तथा प्रजा, मुख्यमंत्री खुद ही चोर है तो प्रदेश के सरकारी मुलाज़िमो से क्या आशा की जाए | उस बेचारी बच्ची की आत्मा को शांति और उसके माँ बाप को कब न्याय मिलेगा, मिलेगा भी की नहीं यह तो कानून के ठेकेदार ही जाने | उत्तर प्रदेश की क़ानून व्यवस्था सेना को सौंप देना चाहिए और पुलिस से कूड़ा साफ़ करवाना चाहिए | जनता को चाहिए बलात्कारी को पकड़ कर बधीया बना दे और अँधा कर दे न रहेगा बांस न आएगी बदबू | जब तक ऐसी कठोर सजा नहीं मिलेगी कोई नहीं सुधरेगा | वन्दे मातरम |

के द्वारा:

अरे आप भी किस की तुलना किस से कर रहे है "कहाँ रजा भोज और कहाँ नंगू तेली" | नीतीशजी एक पाक साफ़ समझदार व्यक्तित्व है, उनके पिता एक स्वतंत्रता सेनानी थे, जिसके रगों में एक स्वतंत्रता सेनानी का खून दौड़ रहा हो और जिसने अपने पिता से इस देश की आज़ादी के लिए संघर्ष की घटनाओ का जीवंत विवरण सुना हो उसके दिल में इस देश और प्रदेश के लिए कुछ कर गुजरने की लालसा जरूर होगी , उसके मन में किसी तरह का लोभ नहीं हो सकता | ऐसा व्यक्ति सच्चे दिल से अपने देश और प्रदेश को चाहेगा, उसको लूटेगा नहीं, उसके विकास के लिए तन मन धन से सेवा करेगा | संयोग से नीतीशजी स्वयं एक इलेक्ट्रिकल इंजिनियर है उनमे दूरदर्शिता है वह अच्छी तरह जानते है की क्या करने से उनके प्रदेश की उन्नति होगी, सबको रोज़गार मिलेगा और जनता सुखी रहेगी | ऐसा ही कुछ गुजरात का भी सीन है, बंगाल भी अब उन्नति करेगा ममता बनर्जी कम से कम चोर तो नहीं है | यहाँ उत्तर प्रदेश में, सत्ता की बागडोर या तो सपा नहीं तो बसपा के हाथ में है, दोनों ही के पार्टी प्रमुख गरीब और मंद बुध्धि परिवार से है, इन लोगो के परिवार में शायद ही कोई स्वतंत्रता संग्राम में भाग लिया होगा, सब के सब भाग के किसी बिल में छुप गए होंगे | दोनों की शैक्षिक योग्यता भी कुछ खास नहीं है | सपा प्रमुख तो अपने युवावस्था में राहगीरों को लूटा करते थे और बसपा प्रमुख भी अपने कॉलेज में गुंडागर्दी किया करती थी | महान पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय श्री वी. पी. सिंह जी ने जब अस्सी के दशक में मंडल कमीशन के तहत आरक्षण के अग्निकुंड में घी डाला तो चारो और हाहाकार मच गया और क्षितिज में कई सारे शनि ग्रहों का उदय हुआ जैसे महामहिम कांशीराम, सुश्री बहन कुमारी मायावतीजी, महान मुलायम सिंहजी, अमर सिंहजी, मोहम्मद आज़म खान इत्यादि | इन सबकी गिद्ध दृष्टी प्रदेश की सत्ता रूपी शारीर पर थी की कब और कैसे मिले और उसे नोच - नोच कर खाया जाए | यह सब भिखारी विकास क्या होता है क्या जाने, इनको तो अपनी झोली भरनी है जिससे यह और इनके आने वाली पीढ़ी टांग पसरकर हर तरह सांसारिक सुख भोग सके | इन सबके नज़र में विकास का मतलब है मुफ्त में चीजों को मुहैया करना और हर बात पर पैसे बांटना, जो बंटता कम है और इन्ही लोगो के जेब में जाता है | जनता भी यह समझ नहीं पाती है की दुनिया में कोई भी चीज़ मुफ्त में नहीं मिलती है और पैसे मिलने से कोई सुख से नहीं रह सकता है | बांटने के लिए यह पैसे आएँगे कहाँ से ? हमारे आपके द्वारा दिए टक्सो से, पैसे बाँट रहे है और इधर सेल टैक्स, मेल टैक्स, VAT , सर्विस टैक्स बढा रहे है सरकार का पैसा सरकार को वापस, महगाई में और इजाफा | बसपा प्रमुख तो अपनी जन्मदिन ऐसे मनाती है जैसे किसी एक साल के बच्चे की मनाई जाती है | ५६ किलो का केक, ५ करोड़ के नोटों की माला, चलो बचपन में नहीं मिला अब ही सही, माँ बाप की क्षमता तो थी नहीं क्या करे बेचारी | अपनी जन्मदिन मानाने के लिए चंदा उगाही करवाती है यहाँ तक की हत्या भी करवाने से पीछे नहीं हटती | ऐसे व्यक्ति से प्रदेश की विकास और उन्नति की क्या आशा की जाए | हाथी और पार्क में करोडो रूपए फूँक दिया है, और अब पार्को में रात भर लाइट जलती रहती है, भले ही तमाम शहरों को बिजली न मिल रही हो , बर्बादी पर बर्बादी | क्या क्या महानता बखान किया जाए | सपा के आते ही अम्बेडकर जी ठप राम मनोहर लोहिया जी चालू | एक पार्टी सत्ता में आती है तो दूसरी इस ताक में रहती है की किसी तरह सरकार गिर जाए या गिरा दी जाए और फिर चुनाव हो, जनता जाए चूल्हे भाड़ में इनका अपना उल्लू तो सीधा होगा न | अगर उत्तर प्रदेश में विकास चाहते है तो इनको उखाड़ फेंकना होगा और नीतीशजी जैसे किसी को लाना होगा वर्ना वोह दिन दूर नहीं जब उत्तर प्रदेश लालू के बिहार में तब्दील हो जाएगा और मेधावियो की जगह मंदबुध्धि मूर्ख को मेडिकल और इंजीनियरिंग में प्रथम स्थान प्राप्त होगा और यह देश और भी रसातल में जाएगा, आने वाली पीढ़ी हमे ही जिम्मेदार ठहराएगी | वन्दे मातरम  

के द्वारा:

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विनोद कुमारजी आपका हर शब्द सच के काफी करीब है पर विवशता इस समाज में यह है की मनुष्य का मनुष्य पर से विश्वास समाप्त हो चला है | इन्सान जब हकीक़त की दुनिया में बहुत विराधाभासो से घिर जाता है अपनों के घात से ही परेशा न रहता है तो उसे एक मायामयी अवस्तिक सहारों में अपने भुलाना लाजिमी हो जाता है } यहीं खड़ा हो जाता है भागवान, अध्यात्म , चमत्कार, और जाने कितने गूढ़ और नितांत झूठे संसार रचने का क्रम | मैंने अपने पिताजी से सीखा यदि झूठ पकड़ना हो तो किसी घटना को उस व्यक्ति से बार बार कुछ समय के बाद पूछो यदि घटना सच है जबाब हर बार एक होगा पर वह यदि झूठ बोला होगा तो जबाब हर बार अलग अलग होगा | भागवान, इश्वर, अल्लाह , क्र्यिस्ट सब अपने को कायनात शुरू होने और रहने तक एकमात्र धर्म व उसका अवतार बताते है बाकि को झूठा | चूँकि सच हमेशा एकसा होता है झूठ एक ही समय कई कई हो सकते है अतः सारे धर्म इश्वर केवल कल्पना व मनुष्य को सही रस्ते पर रखने उस पर अनुशासन और शासन करने को प्रतिस्थापित किये गए थे visit my blog on Satya Sai www.jrajeev.jagranjunction.com

के द्वारा: RaJ RaJ

विनोद जी अन्ना की ईमानदारी पर प्रश्नचिन्ह नहीं लगाया जा सकता है, हां ये आन्दोलन कही कुछ शक्तियां हाई जैक तो नहीं कर रही है इस बारे में शंकाएं जरूर उठ रही है. कोई बात नहीं. जन लोकपाल कोई आखिरी कानून नहीं होगा. उसमे बाद में भी संशोधन किये जा सकेंगे. मात्र ४ दिन में एक जन आन्दोलन भारत ने देखा यह एक नया अनुभव था. सरकार ने घुटने टेक दिए. आशचर्यजनक.  शंका लाजिमी है की एका एक ये कैसे हो गया, क्या जनता भ्रष्टाचार से परेशान थी या कई बड़ी ताकतों ने (सरकार भी) भ्रष्टाचार के मुद्दे पर से अपने गर्दन बचाने के लिए ये खेल खेला जिसे मीडिया ने एक इवेंट की तरह भुनाया. पता नहीं सच क्या है.  जन लोकपाल बिल का परिणाम जो भी निकले, यह भी एक अनुभव होगा देश के लिए की जनता की भावनाओं की इज्जत की गयी है या उन्हें बहुत बड़ा नाटक कर के मूर्ख बनाया गया है.  जो भी हो काठ की हांड़ी बार नहीं चढेगी. 

के द्वारा:

विनोद जी......नमस्कार ! आपकी बात काफी हद तक ठीक है...........लेकिन शायद कुछ ज्यादा हो गयी.......... अन्ना पर उंगली नहीं उठाई जा सकती........... हाँ उनके सिपहसालारों की चादर उजली प्रतीत नहीं होती............ इस कारण उनका बचाव करने वाले भी लिपट ही गए......... ये भी सही है............. कि बिना आग के धुआं नहीं निकलता........... जब इतने पुख्ता प्रमाण दिए जा रहे हैं............ और प्रदेश सरकार स्टंप चोरी का नोटिस दे रही हैं तो ठीक ही होगा......... आखिर स्टंप चोरी भी तो भ्रष्टाचार हैं.............. और आप खुद ही सोचिये....... इलाहाबाद में दस बीघा जमीन में बना मकान एक लाख में खरीदना क्या किसी को हजम हो सकता हैं............... उस पर तुर्रा ये कि कल भी अरविन्द केजरीवाल कह रहे हैं........... कि ये सब सही है............... ये न्यायलय कब से सो गए.... खैर......देखिये.......आगे आगे होता है क्या................ आदित्य www.aditya.jagranjunction.com

के द्वारा:

के द्वारा: vivekpatait2009 vivekpatait2009

के द्वारा: Piyush Pant, Haldwani Piyush Pant, Haldwani

नंदा दीप जलाना होगा| अंध तमस फिर से मंडराया, मेधा पर संकट है छाया| फटी जेब और हाँथ है खाली, बोलो कैसे मने दिवाली ? कोई देव नहीं आएगा, अब खुद ही तुल जाना होगा| नंदा दीप जलाना होगा|| केहरी के गह्वर में गर्जन, अरि-ललकार सुनी कितने जन? भेंड, भेड़िया बनकर आया, जिसका खाया,उसका गाया| मात्स्य-न्याय फिर से प्रचलन में, यह दुश्चक्र मिटाना होगा| नंदा-दीप जलाना होगा| नयनों से भी नहीं दीखता, जो हँसता था आज चीखता| घरियालों के नेत्र ताकते, कई शतक हम रहे झांकते| रक्त हुआ ठंडा या बंजर भूमि, नहीं, गरमाना होगा| नंदा दीप जलाना होगा ||..................................मनोज कुमार सिंह ''मयंक'' प्रिय विनोद जी, आपको और आपके सारे परिवार को ज्योति पर्व दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं || वन्देमातरम

के द्वारा: atharvavedamanoj atharvavedamanoj

किया ग़रीबों और मज़्लोमों के अधिकारों की बात करने का मतलब देश दरोही होना है? सर्कार से अरुंधति रॉय का सवाल —————————————————- ”मैं यह श्रीनगर से लिख रही हूं। आज के अखबार कह रहे हैं कि कश्मीर में दिए गए बयानों के लिए मुझे देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किया जा सकता है। मैंने सिर्फ वही कहा है जो कश्मीर के लाखों लोग रोजाना कहते हैं। मैंने सिर्फ वहीं कहा है जो मैं और मुझ जैसे सैंकड़ों लेखक सालों से लिखते और कहते रहे हैं। वो लोग जिन्हें मेरे भाषणों को पढ़ने की फिक्र है जान जाएंगे कि मेरे शब्द सिर्फ न्याय की मांग है।” मैंने कश्मीर के उन लोगों की बात कि है जो दुनिया में सेना के सबसे खौफनाक शासन में जी रहे हैं। मैंने कश्मीर के उन पंडितों की बात की है जो अपने जन्मस्थान से खदेड़ दिए जाने के बाद बेबसी का जीवन जी रहे हैं। मैंने कश्मीर में शहीद हुए उन दलित सिपाहियों की बात की हैं जिनकी कब्रें कूड़े पर बनाई गई हैं। मैंने कुड्डालोर में इन शहीदों के गांव की यात्रा की है और इनकी कब्रों की दुर्दशा देखी है। मैंने भारत के उन गरीब लोगों की बात की है जो कश्मीमिरी मुस्लमान होने की कीमत चुका रहे हैं और जो अब आतंक के साये में जीना सीख रहे हैं। कल मैंने सोपियां की यात्रा की। दक्षिण कश्मीर में सेब उगाने वाला यह कस्बा पिछले साल आशिया और नीलोफर के रेप और कत्ल के बाद 47 दिन तक बंद रहा था। इन युवतियों के शव घर के करीब एक नाले में मिले थे। आज तक उनके कातिलों को अंजाम तक नहीं पहुंचाया जा सका है। मैंने निलोफर के पति और आशिया के भाई शकील से मुलाकात की। हमारे चारों तरफ खड़े लोगों की आंखों में गुस्सा और दुख साफ देखा जा सकता था। ये लोग न्याय मिलने की उम्मीद खो चुके हैं। मैं उन युवा पत्थरबाजों से भी मिली जिनकी आंखों के सामने गोलियां बरसती हैं। मैंने एक युवक के साथ यात्रा की जिसने मुझे बताया कि अनंतनाग जिले के उसके तीन किशोर दोस्तों को हिरासत में लिया गया और उनकी अंगुलियों के नाखून खींच लिए गए। पत्थर फेंकने की सजा देने के लिए। अखबारों में कुछ लोगों ने मेरे खिलाफ लिखते हुए मुझ पर नफरत भरे भाषण देकर भारत को तोड़ने का आरोप लगाया है। लेकिन मैंने जो कहा है वो प्यार और सम्मान से लिखा है। ये मैंने इसलिए कहा है क्योंकि मैं नहीं चाहती की लोगों की हत्या हो, लड़कियों का बलात्कार हो, युवकों को हिरासत में लेकर उनके नाखून खींच लिए जाए। यह मैंने इसलिए कहा क्योंकि मैं ऐसा समाज चाहती हूं जो खुद को एक कह सके। शर्म है ऐसे राष्ट्र पर जिसे अपने लेखकों की आवाज बंद करनी पडे़। धिक्कार है ऐसे देश पर जहां न्याय की मांग करने वालों को जेल में ठूसने की धमकी दी जाती है जबकि धर्म के नाम पर हत्याएं करने वाले, घोटाले करने वाले, लुटेरे, बलात्कारी और गरीबों की खाल खींचकर अमीर बनने वाले खुलेआम घूमते हैं।”

के द्वारा: SALMAN AHMED, CHANDANPATTI, DARBHANGA, BIHAR , INDIA SALMAN AHMED, CHANDANPATTI, DARBHANGA, BIHAR , INDIA

सच कहा आपने | जब खेत की बाढ़ ही खेत को खाने लगे तो क्या किया जाये | सरकार बनती बदलती रहेगी घोटाले होते रहगे यह सब ऐसा ही चलेगा |आप ऐसा बिलकुल भी मत सोचिये की कांग्रेस जाएगी और बीजेपी या कोई और पार्टी आयेगी तो कुछ ठीक हो जायेगा |कुछ नहीं बदलेगा | समस्या सिर्फ ये पार्टियाँ नहीं है | मूल समस्या तो यह है की जो 34,735 कानून अंग्रेजों ने अपने शासन काल में हमें लुटने, हमेशा के लिए गुलाम बनाने के लिए तथा हम पर अत्याचार व शोषण करने के लिए बनाए थे, आजादी के बाद भी उन्हीं कानूनों को लागू करके, हम पर अत्याचार तथा हमारा शोषण व लूट क्यों? संविधान के अनुच्छेद 372(क) के अनुसार राष्ट्रहित मे कानून व्यवस्थाओं मे परिवर्तन क्यों नहीं होता जब बडे नोटों की प्रिन्टिग बन्द करके तथा 500 व 1000 रुपये के पुराने छपे हुए नोटों को वापस लेकर एक दिन में भ्रष्टाचार, काले भन व नकली करेंसी की समस्या का समाधान कर सकता है तो फिर भ्रष्टाचार को बढाने के लिए बडे नोटों की छपाई क्यों? देश मे मात्र भाषा के कारण ही समस्त व्यवस्थाओं पर 1% लोंगो का एकाधिकार व 99%

के द्वारा: bharatswabhiman bharatswabhiman

सच कहा आपने | जब खेत की बाढ़ ही खेत को खाने लगे तो क्या किया जाये | सरकार बनती बदलती रहेगी घोटाले होते रहगे यह सब ऐसा ही चलेगा |आप ऐसा बिलकुल भी मत सोचिये की कांग्रेस जाएगी और बीजेपी या कोई और पार्टी आयेगी तो कुछ ठीक हो जायेगा |कुछ नहीं बदलेगा | समस्या सिर्फ ये पार्टियाँ नहीं है | मूल समस्या तो यह है की जो 34,735 कानून अंग्रेजों ने अपने शासन काल में हमें लुटने, हमेशा के लिए गुलाम बनाने के लिए तथा हम पर अत्याचार व शोषण करने के लिए बनाए थे, आजादी के बाद भी उन्हीं कानूनों को लागू करके, हम पर अत्याचार तथा हमारा शोषण व लूट क्यों? संविधान के अनुच्छेद 372(क) के अनुसार राष्ट्रहित मे कानून व्यवस्थाओं मे परिवर्तन क्यों नहीं होता जब बडे नोटों की प्रिन्टिग बन्द करके तथा 500 व 1000 रुपये के पुराने छपे हुए नोटों को वापस लेकर एक दिन में भ्रष्टाचार, काले भन व नकली करेंसी की समस्या का समाधान कर सकता है तो फिर भ्रष्टाचार को बढाने के लिए बडे नोटों की छपाई क्यों? देश मे मात्र भाषा के कारण ही समस्त व्यवस्थाओं पर 1% लोंगो का एकाधिकार व 99% लोगों पर अन्याय क्यों

के द्वारा: bharatswabhiman bharatswabhiman

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